कोटक रिपोर्ट में वेस्ट एशिया टेंशन के बीच इंडियन स्टॉक मार्केट के लिए राहत के संकेत, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंड को 27 परसेंट तक बढ़ाने की तैयारी, सरकार का एनर्जी सेल्फ-रिलाएंस पर बड़ा फोकस

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Saturday, April 4, 2026 10:33 AM

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कोटक रिपोर्ट में वेस्ट एशिया टेंशन के बीच इंडियन स्टॉक मार्केट के लिए राहत के संकेत, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंड को 27 परसेंट तक बढ़ाने की तैयारी, सरकार का एनर्जी सेल्फ-रिलाएंस पर बड़ा फोकस

वेस्ट एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) के बीच इंडियन इक्विटी मार्केट (Indian Equity Market) के लिए राहत की खबर (Relief News) सामने आई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की लेटेस्ट रिपोर्ट (Kotak Institutional Equities’ Latest Report) के मुताबिक, अगर ईरान-इजरायल और US के बीच मौजूदा टकराव अगले कुछ हफ्तों में खत्म (Finished in weeks) हो जाता है, तो इंडियन कंपनियों की कमाई (Earnings of Indian Companies) और घरेलू मार्केट (Domestic Market) पर इसका असर काफी लिमिटेड (Quite limited) रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया मंदी के बाद इन्वेस्टर्स (Investors)  के लिए रिस्क और रिटर्न का बैलेंस (Balance of Returns) पहले से बेहतर हो गया है, जिससे मौजूदा लेवल पर इन्वेस्टमेंट (Investment) के मौके और अट्रैक्टिव (Attractive) हो गए हैं। U.S. प्रेसिडेंट के पॉजिटिव कमेंट्स ने भी टेंशन कम (Positive comments also helped reduce tension.) होने और एनर्जी सप्लाई के स्टेबल (Stable Energy Supply) होने की उम्मीदें जगाई हैं, जिससे मार्केट में स्टेबिलिटी लौटने (With stability returning to the market) का संकेत मिलता है।

 

 

 

 

इंडियन गवर्नमेंट पेट्रोल (Indian Government Petrol) में इथेनॉल ब्लेंड लिमिट (Ethanol Blend Limit) को मौजूदा 20 परसेंट (E20) से बढ़ाकर 25-27 परसेंट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (GEMA) के प्रेसिडेंट सी.के. जैन ने साफ़ किया कि भारत की यह पॉलिसी (This policy of India) किसी तुरंत के युद्ध या संकट से प्रेरित (Crisis-driven) नहीं है, बल्कि यह एनर्जी सेक्टर में पूरी तरह से आत्मनिर्भरता हासिल (Complete self-reliance achieved in the energy sector.) करने का एक लंबे समय का लक्ष्य है। 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 के पूरी तरह से लागू होने के बाद, अब फीडस्टॉक और सरप्लस अनाज की पर्याप्त उपलब्धता (Adequate Availability) को देखते हुए इस लक्ष्य को और बढ़ाने की 100 परसेंट संभावना है। इस कदम से न केवल कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था को ग्लोबल झटकों (Global Shocks to the Indian Economy) से बचाने में एक सुरक्षा कवच (a protective shield) का काम भी करेगा।

 

 

 

 

कोटक रिपोर्ट और इथेनॉल सेक्टर की ग्रोथ (Growth of the Ethanol Sector) को मिलाएं तो भारतीय अर्थव्यवस्था एक मज़बूत स्थिति की ओर बढ़ (The Indian economy is moving towards a strong position.) रही है। कोटक के बेस केस सिनेरियो के अनुसार, मौजूदा संघर्ष का ग्लोबल तेल सप्लाई फ्रेमवर्क (The Conflict’s Global Oil Supply Framework) पर कोई लंबे समय तक बुरा असर नहीं पड़ेगा, आने वाले महीनों में कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की सप्लाई सामान्य (Gas supply is normal.) रहने की उम्मीद है। दूसरी ओर, इथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी में बढ़ोतरी और (Increase in ethanol production capacity and) निवेशकों के बढ़ते उत्साह ने भारत को एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security for India) के मामले में एक चेकपॉइंट पार करने में मदद की है। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि घरेलू प्रोडक्शन पर ज़ोर (Emphasis on Domestic Production) और मार्केट में बेहतर रिस्क-रिटर्न प्रोफ़ाइल की वजह से भारत वेस्ट एशिया संकट (India–West Asia Crisis) के बावजूद अपनी ग्रोथ रेट बनाए रख पाएगा।

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