Singrauli News: सिंगरौली भी अजब-गजब; चितरंगी में गार्ड ने लगाया था इंजेक्शन, अब निवास में स्वीपर पर मरीज को इंजेक्शन लगाने का आरोप—CMHO पुष्पराज सिंह से सवाल?
नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली
Singrauli News: सिंगरौली जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था (Healthcare System of Singrauli District) को लेकर सामने आ रहे वीडियो अब गंभीर चिंता का विषय (The video is now a matter of serious concern.) बनते जा रहे हैं। पहले चितरंगी में सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाने का वीडियो (Video of a security guard administering an injection to a patient.) सामने आया था, तो अब निवास क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल (Video goes viral on social media.) हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई दे (A man is seen giving an injection to a patient.) रहा है। दावा किया जा रहा है कि इंजेक्शन लगाने वाला व्यक्ति स्वीपर (person giving injection sweeper) है।
अगर वायरल वीडियो में किया जा रहा दावा सही है तो सवाल बेहद गंभीर (If the claim made in the viral video is true, then the issue is extremely serious.) है—सफाई कर्मचारी के हाथ में इंजेक्शन और मरीज के इलाज की जिम्मेदारी आखिर किस व्यवस्था (What kind of system places a syringe in the hands of a sanitation worker and entrusts them with the responsibility of treating a patient?) के तहत पहुंची?
सिंगरौली में एक तरफ चितरंगी का मामला सामने आया, जहां सुरक्षा गार्ड द्वारा कथित तौर पर मरीजों को इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई (It has come to light that a security guard allegedly administered injections to patients.) थी, और अब निवास में स्वीपर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने का आरोप सामने आ रहा है। ऐसे मामलों से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अस्पतालों में जिम्मेदारियों के बंटवारे (Health department monitoring and the division of responsibilities in hospitals regarding such cases.) पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गार्ड के बाद अब स्वीपर? स्वास्थ्य विभाग संभाल नहीं पा रहा व्यवस्था?
सवाल सीधे जिला स्वास्थ्य विभाग और CMHO डॉ. पुष्पराज सिंह से है—
क्या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की कमी है?
क्या सफाई कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड मरीजों को इंजेक्शन लगाने के लिए अधिकृत हैं?
यदि नहीं, तो इन्हें मरीजों के इलाज से जुड़े काम करने की अनुमति कौन दे रहा है?
चितरंगी के मामले में क्या कार्रवाई हुई?
और अब निवास के वायरल वीडियो पर क्या जांच होगी?
इंजेक्शन लगाना कोई मामूली काम नहीं है। दवा की पहचान, सही मात्रा, मरीज की स्थिति, एलर्जी और संभावित रिएक्शन की जानकारी जरूरी (Information regarding the patient’s condition, allergies, and potential reactions is essential.) होती है। गलत तरीके से या गलत व्यक्ति द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने पर मरीज की हालत बिगड़ सकती है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
अमीरों को विशेषज्ञ डॉक्टर, गरीबों के हिस्से में गार्ड और स्वीपर?
सबसे बड़ा सवाल गरीब और आम मरीजों को लेकर है। प्रभावशाली लोगों के परिवार को इलाज की जरूरत (Families of influential people need medical treatment.) पड़े तो उनके पास बड़े अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा (Availability of specialist doctors) होती है। लेकिन ग्रामीण और गरीब मरीज सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर भरोसा (Poor patients rely on government health centers.) करते हैं।
क्या गरीब मरीज की जिंदगी इतनी सस्ती है कि उसके इलाज में सुरक्षा गार्ड या सफाई कर्मचारी तक (Is the life of a poor patient so cheap that even a security guard or a sanitation worker is required to pay for his treatment?) को लगाया जाए?
यदि वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप जांच में सही साबित (Allegations made in the viral video proven true in the investigation.) होते हैं तो यह केवल एक कर्मचारी की गलती नहीं होगी, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा (Rather, questions have been raised about the entire surveillance system.) करेगा।
CMHO पुष्पराज सिंह दें जवाब
अब जिला स्वास्थ्य विभाग को वायरल वीडियो की जांच कर सार्वजनिक रूप (The district health department has been directed to investigate the viral video and make it public.) से बताना चाहिए कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है, उसकी पदस्थापना क्या है, क्या वह मरीज को इंजेक्शन लगाने के लिए अधिकृत है और घटना किस स्वास्थ्य केंद्र की है।
चितरंगी के बाद निवास—क्या सिंगरौली की स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की जगह अब गार्ड (After Chitrangi, now Niwas—have guards replaced doctors and nursing staff in Singrauli’s healthcare system?) और स्वीपर मरीजों का इलाज करेंगे?
अगर ऐसा नहीं है तो स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करके उदाहरण पेश करे। और यदि वीडियो में लगाए जा रहे आरोप गलत हैं तो CMHO पुष्पराज सिंह स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट करें।
आम आदमी इलाज कराने अस्पताल (The common man goes to the hospital for treatment.) जाता है, अपनी जिंदगी किसी प्रयोग के लिए नहीं सौंपता। गरीब मरीजों को भी वही सुरक्षित और प्रशिक्षित चिकित्सा व्यवस्था (The same safe and trained medical care system for poor patients as well.) मिलनी चाहिए, जो किसी नेता या अधिकारी के परिवार (family of a leader or official) को मिलती है।
अब सवाल सिर्फ निवास के एक वीडियो का नहीं—सवाल है कि चितरंगी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था आखिर क्यों नहीं संभल पा रही है?