Singrauli News:  सिंगरौली में क्रेशरों का बेखौफ खेल; नियम ताक पर, उड़ती धूल से ग्रामीण बेहाल और खनिज विभाग की निगरानी पर सवाल?

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Singrauli News:  सिंगरौली में क्रेशरों का बेखौफ खेल; नियम ताक पर, उड़ती धूल से ग्रामीण बेहाल और खनिज विभाग की निगरानी पर सवाल?

नई ताकत न्यूज नेटवर्क | सिंगरौली

Singrauli News: सिंगरौली जिले के गड़ेरिया, मकरोहर और चितरंगी क्षेत्र में संचालित क्रेशर प्लांटों को लेकर ग्रामीणों ने नियमों के पालन (Villagers demand compliance with regulations regarding operational crusher plants.) पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि कई क्रेशर निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित (It is alleged that many crushers are operated as per the prescribed standards.) नहीं हो रहे हैं और खनिज विभाग की नियमित निगरानी भी प्रभावी नजर नहीं आ रही है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशरों से निकलने वाली धूल आसपास के गांवों (Dust emitted from crushers [affecting] nearby villages) तक पहुंच रही है। इससे घरों, खेतों और सड़कों पर धूल जमने के साथ लोगों को परेशानी का सामना (People facing difficulties due to dust accumulation on the roads.)  करना पड़ रहा है। धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव (Water spraying for dust control) और परिवहन के दौरान सामग्री को ढकने जैसे उपायों के पर्याप्त इंतजाम (Adequate arrangements for measures such as covering the material during transportation.) नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।

 

लीज क्षेत्र से बाहर खनन का आरोप
कुछ क्रेशर संचालकों पर स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर उत्खनन (Excavation by crusher operators outside the sanctioned lease area) किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त टीम बनाकर सीमांकन (Villagers have asked the administration to form a joint team comprising the Revenue and Mining departments to carry out the demarcation.) कराने तथा मौके पर हो रहे उत्खनन की जांच की मांग की है।

 

पौधरोपण पर भी सवाल
क्रेशर क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के लिए होने वाले पौधरोपण (Tree plantation for environmental conservation in crusher zones) को लेकर भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि कई जगह पर्याप्त पौधे नहीं (It is alleged that there are not enough plants in many places.)  लगाए गए और लगाए गए पौधों की देखरेख भी ठीक से नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में नियम (Villagers say that rules are only on paper) पूरे होने और जमीन पर वास्तविक स्थिति में अंतर की जांच जरूरी है।

 

विभागीय निरीक्षण की मांग
ग्रामीणों के मुताबिक जिले में कई क्रेशरों के संचालन को लेकर शिकायतें (Complaints regarding the operation of several crushers in the district.) सामने आती रही हैं, लेकिन मौके पर नियमित निरीक्षण नहीं होने से स्थिति स्पष्ट नहीं हो (The situation remains unclear due to the lack of regular on-site inspections.) पा रही है। उन्होंने प्रशासन से जिलेभर के क्रेशरों की लीज, पर्यावरणीय अनुमति, धूल नियंत्रण, उत्खनन क्षेत्र, पौधरोपण और परिवहन व्यवस्था की जांच कराने की मांग (Demand for an inquiry into the transport system) की है।

 

खनिज विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा (Villagers also raised questions regarding the functioning of the Mining Department.) रहे हैं। कुछ लोगों ने विभागीय अमले और क्रेशर संचालकों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप (People have alleged collusion between departmental staff and crusher operators.)  लगाए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने (The real situation can only be revealed through an impartial investigation.)  आ सकती है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि खनिज कारोबार से सरकार को राजस्व (Revenue to the government from mineral trade)  मिलता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित (Ensuring the safety of the general public) करना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि शिकायतों के बाद जि

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