Singrauli News: बंधा कोल ब्लॉक में कंपनी की मनमानी या जिम्मेदारों की मिलीभगत? विस्थापितों ने आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी की

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Singrauli News: बंधा कोल ब्लॉक में कंपनी की मनमानी या जिम्मेदारों की मिलीभगत? विस्थापितों ने आंदोलन का बिगुल फूंकने की तैयारी की

नारायणी कंपनी के कामकाज, भर्ती में कथित लेन-देन और मुआवजे को लेकर उठे गंभीर सवाल; हैवी ब्लास्टिंग और भारी वाहनों से दहशत में ग्रामीण, जिम्मेदार अधिकारी आखिर चुप क्यों?

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क | सिंगरौली

Singrauli News: सिंगरौली जिले के बंधा कोल ब्लॉक में कोयला परियोजना का काम आगे बढ़ रहा (Work on the coal project at the Bandha coal block is progressing.) है, लेकिन दूसरी ओर विस्थापितों और प्रभावित परिवारों की समस्याएं अब भी सवालों के घेरे (On the other hand, the problems of displaced and affected families are still a matter of question.) में हैं। बिड़ला कंपनी के कोल ब्लॉक में नारायणी कंपनी द्वारा ओवरबर्डन (ओबी) हटाने का काम किए जाने के बीच स्थानीय स्तर पर भर्ती, रोजगार, कथित लेन-देन, मुआवजे (Amidst the overburden (OB) removal work being carried out by Narayani Company at the Birla company’s coal block—issues regarding local recruitment, employment, alleged financial dealings, and compensation.) और विस्थापन को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ सकता है, तो प्रभावित परिवारों के अधिकारों और समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो रहा?

भर्ती और काम के नाम पर कथित खेल, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा सबकुछ?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कंपनी में भर्ती और काम दिलाने के नाम पर कुछ बिचौलियों की सक्रियता की चर्चा है। आरोप हैं कि रोजगार की प्रक्रिया में पारदर्शिता के बजाय प्रभावशाली लोगों की भूमिका बढ़ रही है और कम वेतन पर काम कराने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन हो रहा (Some form of financial transaction is taking place during the recruitment process.)  है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को यह जानने का अधिकार है कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर किस आधार पर तय किए जा रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी (On what basis are employment opportunities for local residents being determined, and how transparent is the recruitment process?)  है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार चाहिए या रोजगार के नाम पर बिचौलियों का दबदबा? यह सवाल अब परियोजना प्रबंधन के सामने खड़ा है।

नेताजी की भूमिका पर सवाल, जनता के मुद्दे पीछे और कंपनी के काम आगे?

सूत्रों का दावा है कि एक स्थानीय नेता की पहल के बाद परियोजना का काम शुरू कराने को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन अब कुछ प्रभावित लोग उसी नेता की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के बजाय भर्ती और काम दिलाने (Allegations are being made that instead of solving the problems of the displaced people, they were given recruitment and employment.)  जैसे मामलों में कुछ लोगों का प्रभाव बढ़ गया है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। आखिर जिन लोगों ने प्रभावित परिवारों की आवाज उठाने का भरोसा दिया (After all, the very people who had promised to raise the voice of the affected families…) था, वे अब उनके सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे? संबंधित नेता को सामने आकर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

हैवी ब्लास्टिंग से दहशत, गांव की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव

ग्रामीणों का आरोप है कि हैवी ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। वहीं, गांव की सड़कों से भारी वाहनों की आवाजाही ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि क्या परियोजना के संचालन में ग्रामीणों की सुरक्षा, मकानों पर संभावित प्रभाव, प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दी जा रही है? यदि ग्रामीणों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभागों ने अब तक क्या जांच की और क्या कार्रवाई की?

मुआवजा और विस्थापन का लाभ कहां अटका? किसानों की परेशानी का जवाब कौन देगा?

बंधा कोल ब्लॉक के प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें अब तक मुआवजे और विस्थापन से जुड़े पात्र लाभ नहीं मिल पाए हैं। जिन किसानों और परिवारों की जमीन तथा जीवन परियोजना से प्रभावित हो रहे हैं, उनके लिए पुनर्वास और उचित मुआवजा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

मुआवजे को लेकर कुछ प्रभावित परिवारों के आत्महत्या का प्रयास करने जैसी गंभीर बातें भी सामने (Serious incidents, such as affected families attempting suicide, have also come to light.) आई हैं। यदि ऐसा हुआ है, तो यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों की स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। प्रशासन को ऐसे मामलों की संवेदनशीलता से जांच कर तत्काल आवश्यक सहायता सुनिश्चित (The administration must investigate such cases with sensitivity and ensure the immediate provision of necessary assistance.) करनी चाहिए।

आखिर प्रभावित परिवार कब तक अपने ही अधिकारों के लिए दर-दर भटकते रहेंगे?

दीपेश भाटिया, अनिल कुमार और बृजेश सिंह से सवाल—जवाबदेही तय होगी या नहीं?

बंधा कोल ब्लॉक से जुड़े दीपेश भाटिया, अनिल कुमार और बृजेश सिंह से संबंधित मामलों में स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रभावित लोग चाहते हैं कि जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर भर्ती, मुआवजा, विस्थापन, ब्लास्टिंग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करें।

यदि परियोजना का संचालन नियमों के अनुरूप हो रहा है, तो प्रबंधन को तथ्यों और दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि कहीं अनियमितता हुई है, तो निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदा

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