Breaking News: UPI पर शुल्क की आहट से छोटे कारोबारियों में चिंता, डिजिटल पेमेंट छोड़ नकदी की ओर लौट सकते हैं विक्रेता; सर्वे में सामने आई बड़ी बात
Breaking News: डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले यूपीआई सिस्टम पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर छोटे कारोबारियों की चिंता बढ़ने (Small business owners are increasingly concerned about the proposed charges on the UPI system, which facilitates digital payments.) लगी है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के एक सर्वेक्षण में सामने आया है कि यदि 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होता है, तो बड़ी संख्या में छोटे विक्रेता डिजिटल भुगतान (If charges are applied to UPI transactions, a large number of small vendors [might move away from] digital payments.) से दूरी बना सकते हैं और दोबारा नकदी का इस्तेमाल बढ़ा सकते (Could increase the use of cash again) हैं।
45 से 53 प्रतिशत विक्रेता घटा सकते हैं यूपीआई का इस्तेमाल
ISB की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वेक्षण में शामिल 67 प्रतिशत सड़क विक्रेता यूपीआई से भुगतान स्वीकार करते हैं (Street vendors accept payments via UPI.) । हालांकि, इनमें से प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था की जानकारी रखने वालों की संख्या काफी कम (The number of people aware of the proposed fee structure is quite small.) है। अलग-अलग शहरों में 45 से 53 प्रतिशत विक्रेताओं ने आशंका जताई कि शुल्क लागू होने पर वे यूपीआई भुगतान लेना कम कर (Sellers expressed apprehension that they would reduce UPI payments if the fee is implemented.) सकते हैं।
आपूर्तिकर्ताओं से होने वाले भुगतान पर पड़ेगा असर
अध्ययन के अनुसार, छोटे दुकानदारों को अपनी बिक्री पर सीधे शुल्क नहीं देना पड़ (Small shopkeepers do not have to pay direct charges on their sales.) सकता, लेकिन जब वे अपने आपूर्तिकर्ताओं को 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करेंगे, तब प्रस्तावित शुल्क का असर पड़ सकता है। इसकी अतिरिक्त लागत यदि छोटे व्यापारियों पर डाली (If its additional cost is passed on to small traders) गई, तो वे नकद में भुगतान करना शुरू कर सकते हैं या इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
14 राज्यों के 722 विक्रेताओं पर हुआ सर्वे
यह अध्ययन 24 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 64 शहरी निकायों में 722 सड़क विक्रेताओं से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। सर्वे में करीब 70 प्रतिशत विक्रेताओं ने बताया कि वे अपने आपूर्तिकर्ताओं को एक बार में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं।
रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई कि सर्वे से पहले के 10 दिनों में 10.4 प्रतिशत विक्रेताओं से उनके आपूर्तिकर्ताओं ने यूपीआई भुगतान के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगा था (10.4 percent of vendors reported that their suppliers had asked for an additional charge for UPI payments.) , जबकि प्रस्तावित व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई थी।
दिवाली तक टला प्रस्तावित शुल्क
सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की योजना को फिलहाल दिवाली तक टाल दिया है। आम लोगों के व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान पर इस प्रस्ताव के तहत कोई शुल्क नहीं रखा गया (Under this proposal, no charges have been imposed on personal UPI payments made by ordinary users.) है। दिवाली के बाद इसे लागू करने की नई तारीख घोषित की जानी (A new date for its implementation is to be announced after Diwali.) है।
अब इस प्रस्ताव पर सभी की नजरें टिकी हैं (All eyes are now on this proposal.) । यदि शुल्क व्यवस्था लागू होती है, तो इसका असर छोटे व्यापारियों के डिजिटल भुगतान व्यवहार और नकदी के इस्तेमाल पर पड़ (The impact will be on the digital payment behaviour and cash usage of small merchants.) सकता है।







