Breaking News: विवाह की तैयारियों में जुटे परिवारों के लिए अच्छी खबर, मलमास समाप्त होने के बाद फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य; जानिए शादी के शुभ मुहूर्त और खास तिथियां

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Breaking News: विवाह की तैयारियों में जुटे परिवारों के लिए अच्छी खबर, मलमास समाप्त होने के बाद फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य; जानिए शादी के शुभ मुहूर्त और खास तिथियां

Breaking News: अभी मलमास चल रहा है। यह समय पूजा-पाठ (time worship) और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता (It is considered auspicious for charity) है लेकिन इस दौरान कोई भी शुभ कार्यक्रम (auspicious event) नहीं होते हैं। इस समय शादी, मुंडन, गृहप्रवेश, जनेऊ जैसे संस्कार (rites) नहीं किए जाते हैं। अधिकमास 15 जून को खत्म होगा, जिसके बाद एक बार फिर शादियां शुरू (Marriages began once again after) हो जाएंगी।

 

 

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि मलमास के बाद शादी के मुहूर्त कब से शुरू (When does the auspicious time for marriage start after Malmas?) होंगे, तो हम आपके लिए तारीखों (dates) की जानकारी (Date information for you) लाए हैं। पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित (Dedicated) है और इस समय जप, तप, स्नान और पूजा-पाठ को बहुत शुभ माना (Worship is considered very auspicious) गया है। आइए जानते हैं इसके बाद शादी के मुहूर्त (After this, the auspicious time for marriage) कब हैं।

 

अधिकमास के बाद जून के मुहूर्त
15 जून को मलमास खत्म होने के बाद पहला शुभ मुहूर्त (The first auspicious time after the end of Malmas) 21 जून को है। इसके बाद 22, 23, 24, 25, 26 और 29 तारीख को मुहूर्त (auspicious time on the date) हैं।

 

जुलाई के मुहूर्त
जुलाई महीने में भी शादी के लिए शुभ मुहूर्त (Auspicious time for marriage in any month)  है। 11 और 12 तारीख को किया जा सकता है। 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास शुरू होगा। इसका पहला शादी का मुहूर्त मिल रहा है। असल में चातुर्मास शुरू होने से पहले 22 जुलाई को भड़ली नवमी आएगी। इस दिन को शादी के लिए आखिरी अबूझ मुहूर्त (The last auspicious time for marriage on this day) माना जाता है लेकिन इस दिन गुरु तारा अस्त रहेगा इसलिए शादी (Marriage) नहीं होगी।

 

चातुर्मास का महत्व
चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी (Beginning with Devshayani Ekadashi) से होती है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले (go into yoga nidra)  जाते हैं। कहा जाता है कि वह सृष्टि का सारा भार भगवान शिव को सौंपकर पाताल लोक (Handing over the entire burden of the universe to Lord Shiva, Patala Lok) में राजा बलि के यहां विश्राम करने (to rest here) चले जाते हैं। इन चार महीनों में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक काम करने की मनाही (Prohibition of doing auspicious work) होती है। इस दौरान व्रत और पूजा (Prayer) तो की जाती है लेकिन शादी और मुंडन जैसे रीति-रिवाज (rituals like tonsure)नहीं होते। दिवाली के दौरान जब देव उठनी एकादशी (When Dev Uthani Ekadashi is celebrated during Diwali) आती है तो शुभ काम शुरू हो जाते हैं।

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