Diesel and Petrol Prices: तेल संकट से हिली देश की अर्थव्यवस्था, क्रूड ऑयल $120 पार, सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने ₹30,000 करोड़ का भारी नुकसान
Diesel and Petrol Prices: भारत की सरकारी तेल कंपनियां (India’s State-Owned Oil Companies) —IOC, BPCL और HPCL—दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी (Massive surge in crude oil prices worldwide.) के कारण गहरे फाइनेंशियल संकट का सामना (Facing a deep financial crisis) कर रही हैं। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें $70 से बढ़कर $120 प्रति बैरल हो गई हैं, जिससे इन कंपनियों को हर दिन (Companies, every day) लगभग 700 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (Joint Secretary, Ministry of Petroleum) सुजाता शर्मा के अनुसार, घरेलू स्तर पर पेट्रोल (petrol at domestic level) , डीज़ल और LPG की कीमतें स्थिर रखने के कारण तेल कंपनियों (Oil companies, due to keeping LPG prices stable…) का कुल मासिक नुकसान (अंडर-रिकवरी) 30,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक गंभीर चुनौती खड़ी (The conflict has posed a serious challenge to India’s energy security.) कर दी है। भारत अपनी तेल ज़रूरतों का 88 प्रतिशत इम्पोर्ट (India imports 88 percent of its oil needs) करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत क्रूड ऑयल और 90 प्रतिशत LPG पर असर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट में टैंकर मूवमेंट में रुकावट की वजह से माल ढुलाई (Freight traffic disrupted due to disruption in tanker movement in the Strait of Hormuz) के चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम में तेज़ी से बढ़ोतरी (Rapid Increase in Insurance Premiums) हुई है। जापान, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने फ्यूल की कीमतों में 25 से 34 परसेंट की बढ़ोतरी की है, वहीं भारत में सरकार ने आम लोगों को कीमतों के झटकों (In India, the government has provided relief to the common people from price shocks.) से बचाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती (Reduction in Excise Duty) की है।
सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (The government has waived excise duty on petrol) 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीज़ल पर ज़ीरो कर दी है, जिससे सरकारी खजाने पर हर महीने (to the government treasury every month) 14,000 करोड़ रुपये का खर्च भी आ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि अगर यह कदम नहीं उठाया (Officials said that if this step is not taken…) जाता, तो तेल कंपनियों का घाटा (Oil Companies’ Losses) 62,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था। फिलहाल, सरकार का फोकस कंज्यूमर्स को राहत (Government Focus: Relief for Consumers) देने और आर्थिक निरंतरता (Economic Continuity) बनाए रखने पर है। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे लेवल (If crude oil prices remain at high levels for a long time) पर बनी रहती हैं, तो इसका तेल कंपनियों के वर्किंग कैपिटल (Its working capital of oil companies) और भविष्य के विस्तार प्लान पर बुरा असर पड़ (This will negatively impact future expansion plans.) सकता है।







