सिंगरौली: आराधना सिंह परिहार को क्लीन चिट या विभागीय जांच अब भी लंबित? सामने आया पुलिस अधीक्षक का अहम पत्र
महिला थाना प्रभारी बनाए जाने के बीच 29 अगस्त के पत्र ने बढ़ाए सवाल, विभागीय जांच में मांगा गया था लिखित बचाव और दस्तावेज
नई ताकत न्यूज नेटवर्क
सिंगरौली। महिला थाना प्रभारी आराधना सिंह परिहार को लेकर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उन्हें वर्तमान में महिला थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दिए जाने के बीच अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय सिंगरौली का 29 अगस्त 2026 का एक पत्र सामने आया है, जिसमें विभागीय जांच से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज है।
सामने आए पत्र के अनुसार, पुलिस महानिरीक्षक (Inspector General of Police) रीवा जोन, रीवा के आदेश के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दिए गए थे। इसके बाद पुलिस अधीक्षक, जिला सिंगरौली को विभागीय जांच का जांचकर्ता अधिकारी (Inquiry Officer) एवं प्रस्तुतकर्ता अधिकारी (Presenting Officer) नियुक्त किया गया था।
पत्र में उल्लेख है कि विभागीय जांच में अभियोजन साक्ष्य (Prosecution Evidence) की कार्यवाही पूरी हो चुकी है और मुख्य परीक्षण (Examination) भी किया जा चुका है।
17 अगस्त के पत्र से मांगा गया था लिखित बचाव
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पत्र में बताया गया है कि 17 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों को अपना लिखित बचाव (Written Defence) तथा बचाव साक्ष्य/दस्तावेज (Defence Evidence/Documents) प्रस्तुत करने के लिए 30 दिनों के भीतर निर्देशित किया गया था।
29 अगस्त 2026 को जारी पत्र में पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से लिखा गया कि उक्त बचाव एवं दस्तावेज उस तारीख तक कार्यालय में प्राप्त नहीं हुए थे और संबंधित अधिकारियों को उन्हें सीधे कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रकरण में अग्रिम कार्रवाई (Further Proceedings) की जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल—जांच का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
यहीं से आराधना सिंह परिहार की वर्तमान पदस्थापना को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
यदि विभागीय जांच पूरी हो चुकी है, तो उसका अंतिम निष्कर्ष (Final Finding) क्या रहा? क्या उन्हें क्लीन चिट (Clean Chit) दी गई? क्या आरोप समाप्त कर दिए गए? या विभागीय जांच में कोई अन्य निर्णय लिया गया?
वहीं, यदि जांच का अंतिम आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, तो महिला थाना प्रभारी के रूप में उनकी पदस्थापना का प्रशासनिक आधार (Administrative Basis) क्या है?
इन सवालों का जवाब विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट (Final Inquiry Report) और संबंधित आदेश (Final Order) से ही स्पष्ट हो सकता है।
पत्र से क्या साफ होता है?
29 अगस्त के पत्र से कम से कम इतना स्पष्ट होता है कि उस तारीख को विभागीय जांच की प्रक्रिया में लिखित बचाव एवं बचाव साक्ष्य मांगे जाने की स्थिति थी। हालांकि, केवल इस पत्र के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि 27 सितंबर 2026 तक जांच निश्चित रूप से लंबित है, क्योंकि 17 अगस्त के निर्देश के बाद आगे कोई अंतिम आदेश या जांच रिपोर्ट जारी हुई हो सकती है।
इसलिए अब पुलिस विभाग से यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि 17 अगस्त के बाद संबंधित विभागीय जांच में क्या कार्रवाई हुई और उसका अंतिम परिणाम क्या रहा।
महिला थाना प्रभारी की जिम्मेदारी पर भी सवाल
सिंगरौली पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में आराधना सिंह को महिला थाना प्रभारी के रूप में दर्ज किए जाने के बीच यह दस्तावेज सामने आया है। ऐसे में विभागीय पारदर्शिता (Transparency) के लिहाज से पुलिस विभाग को जांच की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्या विभागीय जांच समाप्त हो चुकी है?
क्या अंतिम रिपोर्ट तैयार हो चुकी है?
क्या आराधना सिंह परिहार को क्लीन चिट मिली है?
या जांच के बाद अंतिम निर्णय अभी बाकी है?
इन सवालों का जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला थाना प्रभारी के रूप में उनकी वर्तमान जिम्मेदारी और विभागीय जांच के बीच वास्तविक स्थिति क्या है।
नई ताकत न्यूज नेटवर्क द्वारा सामने आए दस्तावेज के आधार पर सवाल उठाए गए हैं। संबंधित पुलिस अधिकारी या पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।







