ट्रंप-सऊदी कनेक्शन से मिडिल ईस्ट में हलचल, क्या ईरान युद्ध जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है? रिपोर्ट से हलचल
वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे महायुद्ध (The Great War) के 25वें दिन, एक ऐसी रिपोर्ट (Report) सामने आई है जिसने दुनिया भर के स्ट्रैटेजिस्ट (Strategists from around the world) को चौंका दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट (A report by The New York Times) के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी प्रेसिडेंट (Salman [met] the American President.) डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ चल रहे मिलिट्री ऑपरेशन (Military Operation) को रोकने के बजाय उसे जारी रखने की अपील की है।
पब्लिक बनाम प्राइवेट रुख
दिलचस्प (interesting) बात यह है कि सऊदी अरब का पब्लिक रुख डिप्लोमैटिक (Diplomatic) और शांतिपूर्ण रहा है। ऑफिशियल (Official) बयानों में, सऊदी सरकार ने हमेशा लड़ाई के शांतिपूर्ण समाधान (Peaceful Solution) का समर्थन किया है और कहा है कि उसकी प्राथमिकता (His priority) अपने नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा (Protection of Infrastructure) करना है। हालांकि, पर्दे के पीछे, सऊदी अरब ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (Energy Infrastructure) को निशाना बनाने और उसे कमजोर करने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन का भी समर्थन (Support for Ground Operations as Well) कर रहा है।
होर्मुज की खाड़ी और तेल संकट
सऊदी अरब के इस रुख के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात भी की। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा होर्मुज (The Main Issue: Hormuz) की खाड़ी को खुला रखना था। युद्ध ने इस रास्ते से होने वाले दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस व्यापार को रोक दिया है, जिसे इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) ने अब तक की सबसे बड़ी सप्लाई(Supply) रुकावट बताया है।
PM मोदी ने राज्यसभा में साफ किया कि भारत इस तनाव को कम (India seeks to de-escalate this tension.) करने के लिए ईरान, इज़राइल और US के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम लोगों और कमर्शियल जहाजों (Commercial ships) पर हमले ‘मंज़ूर नहीं’ हैं और भारत की प्राथमिकता ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित (India’s Priority: Ensuring Global Energy Security) करना है।







