diesel petrol price:  क्या 4 मई के बाद महंगा होगा ईंधन या ग्लोबल संकट का असर पड़ेगा आपकी जेब पर?विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Saturday, May 2, 2026 10:21 AM

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diesel petrol price: क्या 4 मई के बाद महंगा होगा ईंधन या ग्लोबल संकट का असर पड़ेगा आपकी जेब पर?विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब

diesel petrol price:  देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म (Assembly elections conclude in five states of the country.)  होने के बाद अब आम जनता फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी (Fuel Price Hike for the General Public) को लेकर परेशान (Worried) है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा (Claims in media reports) किया जा रहा है कि तेल कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल (Oil companies are selling petrol to compensate for their losses.)  और डीज़ल के दाम 4 से 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा सकती हैं। विपक्ष के नेता (Leader of the Opposition)  राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया है कि चुनाव खत्म होते ही सरकार लोगों (As soon as the elections are over, the government) पर महंगाई का बोझ डाल (Imposing the burden of inflation) देगी। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर माल ढुलाई और दूध-सब्जियों जैसी रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली चीज़ों की कीमतों (The prices of daily-use items such as milk and vegetables) पर पड़ना तय है।

 

 

 

 

 

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री (Union Petroleum Minister) हरदीप पुरी ने शुक्रवार को फ्यूल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी (Potential Increase in Fuel Prices) की खबरों के बीच सरकार का पुरजोर बचाव (Vigorous Defense of the Government) किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव (Huge fluctuations in the global energy market) और युद्ध जैसे हालात के बावजूद भारत ने पिछले 4 साल 60 दिनों से पेट्रोल-डीज़ल के दाम स्थिर (Petrol and Diesel Prices Stable) रखे हैं। पुरी के मुताबिक, जहां पड़ोसी देशों में फ्यूल की कीमतें 39 से 66 परसेंट तक बढ़ गई हैं और राशनिंग जैसी मुश्किलों (Difficulties such as rationing)  का सामना करना पड़ रहा है, वहीं मोदी सरकार ने जियोपॉलिटिकल टेंशन (The government has addressed the geopolitical tensions) और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भी देश में कीमतों को कंट्रोल में रखा है।

 

 

 

 

असेंबली इलेक्शन (Assembly Elections) के लिए वोटों की गिनती 4 मई को होनी है और पॉलिटिकल गलियारों (Political corridors)  में चर्चा है कि नई सरकार बनने के तुरंत बाद तेल की कीमतों (Oil prices rose immediately after the formation of the new government.) में बदलाव किया जा सकता है। मौजूदा ईरान-US और इजरायल विवाद ने इंटरनेशनल लेवल पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन (The Global Crude Oil Supply Chain) पर असर डाला है। हालांकि सरकार लगातार दावा करती रही है कि लोगों को महंगाई (Inflation for the people) से बचाया जाएगा, लेकिन तेल कंपनियों के बढ़ते दबाव (Increasing Pressure from Oil Companies) को देखते हुए मार्केट में अनिश्चितता (Market Uncertainty) है। अब यह 4 मई के बाद साफ होगा कि राहुल गांधी का दावा सच है या सरकार कीमतों को स्टेबल रखने में कामयाब (The government succeeds in keeping prices stable.) होती है।

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