Breaking News: महंगाई से बिगड़ेगा घर का बजट? अब साबुन, बिस्कुट और पैकेज्ड सामान के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी, बढ़ती लागत के कारण FMCG कंपनियां कीमतें बढ़ाने की तैयारी में?
Breaking News: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Surge in crude oil prices) , पैकेजिंग मटीरियल (Packaging Material) और फ्यूल की लागत में तेज बढ़ोतरी के कारण फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (Fast-Moving Consumer Goods due to rapid growth) (FMCG) की कीमतें अब बढ़ने वाली हैं। डाबर, ब्रिटानिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) जैसी बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे पर दबाव कम (Reduced pressure on profits) करने के लिए धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने की योजना बना (Planning to increase prices gradually) रही हैं। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव (Ongoing geopolitical tensions in West Asia) और ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों ने कच्चे माल (Disruptions in global supply chains have led to shortages of raw materials) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) को और महंगा कर दिया है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी मैन्युफैक्चरिंग (The rupee’s weakness against the dollar has also impacted manufacturing.) लागत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई (Played a major role) है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक (According to market experts) , साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट और सॉफ्ट ड्रिंक जैसे प्रोडक्ट्स की कीमतें (Prices of products such as soft drinks) 3 से 5 परसेंट तक बढ़ सकती हैं। डाबर इंडिया के CEO मोहित मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि कंपनी करीब 10 परसेंट की महंगाई का सामना (Coping with Inflation) कर रही है, जिसकी भरपाई के लिए कीमतों में पहले ही औसतन 4 परसेंट की बढ़ोतरी की जा चुकी है। इस बीच, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी गुड डे (Britannia Industries also released Good Day,) , मेरी गोल्ड और टाइगर जैसे पॉपुलर ब्रांड्स के बड़े पैक्स की कीमतें बढ़ाने (Raising the prices of large packs of popular brands like Tiger) और वज़न कम करने (ग्रामेज रिडक्शन) के ऑप्शन पर विचार करना शुरू कर दिया है। HUL ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अगर कमोडिटी की कीमतें कम (Commodity prices are low.) नहीं हुईं, तो वे आगे भी कीमतें बढ़ाने से पीछे नहीं हटेंगे।
कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद (Despite the increase in prices) , कंपनियां ग्रामीण (Rural Companies) और कम इनकम वाले मार्केट को ध्यान में रखते हुए 5 रुपये, 10 रुपये और 15 रुपये के छोटे पैक्स की कीमतें स्थिर रखने की कोशिश (Efforts to Keep Prices of Small Packs Stable) कर रही हैं। सेल्स पर पड़ने वाले बुरे असर को कम करने के लिए, कंपनियां एडवरटाइजिंग (Companies Advertising) और प्रमोशनल खर्च में कटौती (Reduction in Promotional Expenses) कर रही हैं और अपने इन्वेंट्री मैनेजमेंट को और बेहतर बनाने में लगी हुई हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) में 15 से 20 परसेंट की बढ़ोतरी की उम्मीद के साथ, आम कंज्यूमर्स पर बोझ पड़ना लगभग तय है। आने वाले महीनों में किचन बजट और पर्सनल केयर आइटम्स पर होने वाला खर्च बजट बिगाड़ (Spending on Personal Care Items Derails the Budget) सकता है।







