SATNA NEWS: सतना में ‘जागरूकता’ के नाम पर बवाल, ट्रैफिक में NGO की एंट्री से अराजकता, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल?

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By: नई ताक़त ।। डिजिटल टीम

On: Tuesday, May 5, 2026 6:51 AM

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SATNA NEWS: सतना में ‘जागरूकता’ के नाम पर बवाल, ट्रैफिक में NGO की एंट्री से अराजकता, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल?

नई ताकत न्यूज़ नेटवर्क 
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SATNA NEWS:  रोड सेफ्टी (Road Safety) , ट्रैफिक रूल्स और रिस्पॉन्सिबल ड्राइविंग से जुड़े जागरूकता कैंपेन चलाने का दावा (Claim of conducting awareness campaigns related to responsible driving.) करने वाले एक NGO के लोगों ने लोकल सर्किट हाउस चौराहे पर अराजकता फैला (NGO members created chaos at the local Circuit House intersection.) दी। ट्रैफिक पुलिस के कहने पर एक दर्जन से ज़्यादा NGOs राहगीरों को पकड़ने और ज़बरदस्ती उनके चालान काटने (Forcibly issuing fines to them) के लिए दौड़ पड़े। कुछ आम लोग न सिर्फ़ नाराज़ हुए बल्कि ट्रैफिक पुलिस वालों की जगह NGOs (Rather, NGOs instead of traffic police personnel.) को बिना इजाज़त के दखल देते देख उन्होंने कड़ा एतराज़ (Upon seeing the unauthorized interference, they raised a strong objection.) भी जताया।

 

 

 

 

 

सोमवार शाम करीब 5 बजे ट्रैफिक थाने (Traffic Police Station at 5 o’clock) के उनि राम देवी राय की लीडरशिप (Ram Devi Rai’s Leadership) में करीब आधा दर्जन ट्रैफिक कर्मी शहर के सर्किट हाउस चौक (Half a dozen traffic personnel at the city’s Circuit House Chowk.) पर पहुंचे। मौके पर पहले से ही जीतंत फाउंडेशन नाम (Jeetant Foundation Name) के एक NGO के एक दर्जन से ज़्यादा लोग मौजूद थे। खुद को NGO का डायरेक्टर बताने वाले सुजीत तिवारी और प्रशांत मिश्रा भी कुछ युवकों के साथ मौजूद थे। NGO के युवकों ने ऑरेंज रेडियम वाली जैकेट (The young men wore jackets with orange radium accents.) भी पहनी हुई थी।

 

 

 

 

महिलाओं ने किया कड़ा एतराज़
कथित NGO मेंबर्स को गैर-कानूनी तरीके से लोगों का पीछा (Alleged NGO members are being caught stalking people illegally.) करते और फिर ज़बरदस्ती उनके चालान काटते देख कुछ महिला राहगीर हैरान (Then, seeing their challans being issued forcibly, some female passersby were astonished.) रह गईं। महिलाओं ने इस पर कड़ा एतराज़ जताया और पूछा कि NGO को आम आदमी पर दबाव बनाने का हक़ किसने (Who has the right to pressure the common man?) दिया। इतना ही नहीं, कुछ महिलाओं ने इस पूरी कार्रवाई को ट्रैफिक पुलिस और NGO की मिलीभगत से अवैध वसूली बताया। महिलाओं ने कहा कि जब स्मार्ट सिटी सतना में इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (Integrated Control and Command Centre in Smart City Satna) के ज़रिए ट्रैफिक मॉनिटरिंग (Traffic Monitoring) और चालान सिस्टम ठीक (The challan system is fine.)  है, तो फिर ट्रैफिक कर्मियों को कथित NGO के गुंडों के ज़रिए लोगों को परेशान करने की इजाज़त (Permission to harass) कैसे दी जा सकती है? नतीजतन, सर्किट हाउस चौक पर न सिर्फ़ काफ़ी देर तक हंगामा (There was not only a prolonged commotion at Circuit House Chowk…) होता रहा, बल्कि ट्रैफिक सिस्टम भी प्रभावित रहा।

 

 

 

 

 

किसकी इजाज़त से मिले अधिकार
कहा जा रहा है कि जिंत फाउंडेशन स्ट्रीट स्मार्ट इंडिया नाम से ट्रैफिक अवेयरनेस कैंपेन (A Traffic Awareness Campaign Titled ‘Street Smart India’ by the Foundation) चलाने का दावा कर रहा है। जिसका मकसद मुख्य चौराहों, स्कूल एरिया और पब्लिक जगहों पर लोगों से सीधे बातचीत करके हेलमेट पहनने (Wear a helmet by talking directly.) , सीट बेल्ट लगाने और सुरक्षित गाड़ी चलाने के लिए प्रेरित (Motivated to Drive Safely) करना था। लेकिन आखिर में कुछ इजाज़त लेकर उसने पुलिस का काम अपने हाथ में ले लिया। आखिर में कुछ इजाज़त लेकर (Finally, with some permission)  NGO को राहगीरों को कुचलने, उन्हें परेशान करने और पब्लिक जगहों पर अव्यवस्था फैलाने का हक़ (Right to create disorder in public places) दे दिया गया। तो क्या यह मान लिया जाए कि उस NGO का इस्तेमाल ट्रैफिक पुलिस स्टाफ ने ट्रैफिक अवेयरनेस के नाम पर खुलेआम (Traffic police personnel openly engaged in such practices in the name of traffic awareness.)  वसूली के लिए किया था।

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